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Sonam Wangchuk Hunger Strike: लद्दाख से जंतर-मंतर तक के अनशन का पूरा घटनाक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य

मशहूर इनोवेटर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) एक बार फिर देश की सुर्खियों में हैं। लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूर्व में किए गए लंबे अनशनों के बाद, उनका नया आंदोलन अब नई दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच चुका है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों (UPSC, State PSC, SSC) के लिए यह विषय न केवल राष्ट्रीय समसामयिकी (Current Affairs) बल्कि भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम उनके आंदोलनों के इतिहास, लद्दाख की चार मुख्य मांगों, संविधान की छठी अनुसूची, और हालिया घटनाक्रमों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

Sonam Wangchuk Hunger Strike Analysis Guide

1. सोनम वांगचुक के अनशन का इतिहास और हालिया घटनाक्रम (Timeline of Protests)

सोनम वांगचुक पिछले कुछ वर्षों से लगातार अहिंसक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के जरिए सरकार और जनता का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उनके प्रमुख अनशनों का कालानुक्रमिक विवरण नीचे दिया गया है:

  • जनवरी 2023 (5-दिवसीय जलवायु उपवास): वांगचुक ने लद्दाख में बढ़ते औद्योगीकरण और अनियंत्रित खनन के खतरों को रेखांकित करने के लिए अपना पहला प्रमुख उपवास किया। इस प्रदर्शन ने लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के प्रति देश को जागरूक किया।
  • मार्च 2024 (21-दिवसीय क्लाइमेट फास्ट): केंद्र सरकार के साथ लद्दाख के प्रतिनिधियों की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने लेह में 21 दिनों का कड़ा जलवायु उपवास रखा। इसके बाद उन्होंने लद्दाख के अधिकारों को रेखांकित करने के लिए 'दिल्ली चलो' मार्च का भी आह्वान किया था।
  • सितंबर 2025 (35-दिवसीय भूख हड़ताल और नजरबंदी): लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन में भाग लेते हुए वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे। इस दौरान हुए कुछ हिंसक घटनाक्रमों के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया। छह महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मार्च 2026 में उनकी रिहाई संभव हो सकी।
  • जून-जुलाई 2026 (जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन): अपनी रिहाई के बाद वांगचुक ने एक बार फिर दिल्ली का रुख किया。 28 जून 2026 से वे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लद्दाख के स्थानीय मुद्दों से इतर, इस बार वे देश के युवाओं और छात्रों के संगठन (जैसे कॉकरोच जनता पार्टी) के समर्थन में खड़े हुए हैं, जो राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) सहित अन्य परीक्षाओं में हुई धांधली व विसंगतियों की जवाबदेही तय करने और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। जुलाई 2026 के मध्य तक उनके अनशन को 20 दिन पूरे हो चुके हैं और उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की गई है।

2. लद्दाख आंदोलन की 4 मुख्य मांगें (Four Core Demands)

वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश (UT) बना दिया गया था। इसके बाद से ही वहां के दो प्रमुख नागरिक संगठनों—लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA)—ने मिलकर चार सूत्री एजेंडा तैयार किया है, जिसे लेकर सोनम वांगचुक संघर्षरत रहे हैं:

1. पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood for Ladakh): लद्दाख के लोगों का मानना है कि केवल केंद्र शासित प्रदेश होने से उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सीमित हो जाती है। वे एक पूर्ण राज्य और चुनी हुई विधानसभा की मांग कर रहे हैं ताकि स्थानीय लोग स्वयं अपने नियम तय कर सकें।

2. संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना (Inclusion in the Sixth Schedule): लद्दाख की लगभग 90% से अधिक आबादी जनजातीय है। वे अपनी ज़मीन, नौकरी और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा के लिए संवैधानिक गारंटी चाहते हैं।

3. अलग लोक सेवा आयोग (Separate Public Service Commission): लद्दाख के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में स्थानीय स्तर पर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु एक समर्पित पीएससी (PSC) की मांग की जा रही है।

4. अतिरिक्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व (Additional Political Representation): वर्तमान में लद्दाख क्षेत्र से केवल एक लोकसभा सीट है। दोनों संगठन संसद में लद्दाख के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने (लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग) की मांग कर रहे हैं।

3. भारतीय संविधान की छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 का गणित (Polity Concepts for Exams)

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को इस विवाद से जुड़े संवैधानिक पहलुओं को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में सीधे तौर पर यहां से प्रश्न पूछे जा सकते हैं:

संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) क्या है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275(1) के तहत छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (याद रखने की ट्रिक: AMTM) राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान करती है। इसके तहत **स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils - ADCs)** का गठन किया जाता है। इन परिषदों के पास भूमि प्रबंधन, वन, विवाह, विरासत और प्राथमिक शिक्षा जैसे विषयों पर कानून बनाने की विधायी शक्तियां होती हैं। लद्दाख के प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग इसी व्यवस्था को अपने क्षेत्र में लागू कराने की है।

अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित विशेष ढांचा (Article 371 Customised Framework)

हालिया रिपोर्टों और आधिकारिक वार्ताओं के अनुसार, गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक प्रगति देखी गई है। केंद्र सरकार ने लद्दाख की विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए **अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष अनुकूलित ढांचा (Customised Framework)** प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है, जो नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों की तर्ज पर स्थानीय भूमि और सांस्कृतिक अधिकारों का संरक्षण करेगा। इसके साथ ही लद्दाख के सभी 7 जिलों में हिल काउंसिल स्थापित करने और एक उच्च-स्तरीय केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निकाय बनाने पर सहमति बनती दिख रही है।

4. सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के लिए प्रैक्टिकल टिप्स (Exam Preparation Strategy)

करेंट अफेयर्स के ऐसे संवेदनशील और गतिशील (Dynamic) विषयों को कवर करते समय छात्रों को निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • तथ्यों पर ध्यान दें, राजनीति पर नहीं: किसी भी आंदोलन के राजनीतिक पक्ष या बयानों में उलझने के बजाय उसके संवैधानिक आधार (जैसे छठी अनुसूची बनाम पांचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 371 के विभिन्न खंड, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रावधान) को डायरी में नोट करें।
  • सरकारी प्रेस रिलीज का संदर्भ लें: किसी भी विवादित दावे की सत्यता जांचने के लिए पत्र सूचना कार्यालय (PIB) या संबंधित मंत्रालयों की आधिकारिक वेबसाइटों पर जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।
  • मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के दृष्टिकोण से सोचें: यदि आप UPSC या State PCS की तैयारी कर रहे हैं, तो 'पारिस्थितिकीय संरक्षण बनाम औद्योगिक विकास' (Ecological Conservation vs Industrial Development) और 'संघवाद एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएं' (Federalism and Regional Aspirations) जैसे विषयों पर संतुलित उत्तर लिखने का अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मुख्य कारण क्या है?

सोनम वांगचुक ने लद्दाख की सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची (Sixth Schedule) लागू करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर पूर्व में लंबे अनशन किए हैं। वर्तमान में जुलाई 2026 में वे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में हुई कथित धांधलियों के खिलाफ और जवाबदेही की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं।

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची लद्दाख के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

छठी अनुसूची आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के गठन की अनुमति देती है, जिसके पास भूमि, संस्कृति और रोजगार के मामलों पर कानून बनाने की शक्ति होती है। लद्दाख के लोग अपनी जनसांख्यिकी और पर्यावरण को बचाने के लिए इसकी मांग कर रहे हैं。

लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे में हाल ही में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं?

केंद्र सरकार ने लद्दाख में विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी 7 जिलों में हिल काउंसिल बनाने और अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष अनुकूलित ढांचा प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक बातचीत आगे बढ़ाई है।

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